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पाँच साल की तैयारी के बाद आदित्य पांडेय का नियुक्ति आदेश आ गया है। सुरसरी का नया अंचल अधिकारी अब ज़मीन, फ़ाइलों और अपनी पहली कुर्सी का हिसाब सँभालेगा।
लेकिन परीक्षा की किताबों में यह नहीं लिखा था कि बड़े बाबू की चुप्पी का क्या मतलब है, चपरासी को अफ़सर से ज़्यादा कैसे पता होता है और सरकारी दफ़्तर में मीठी चाय से क्यों सावधान रहना चाहिए।
हँसी के पीछे ज़मीन के विवाद, शिकायतें और लोगों की उम्मीदें हैं। आदित्य को सीखना है कि कुर्सी पर बैठना और उसकी ज़िम्मेदारी उठाना एक बात नहीं है।
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