Description
सप्तद्वार: कालाधर का रहस्य
एक रहस्यमयी द्वीप, गुप्त प्रयोग और सात दरवाजों के पीछे छिपे सवालों से शुरू हुई कहानी।
भाग 2 — वह आएगा… कालाधर का रहस्य
जब प्राचीन शक्तियों की विरासत, दुनिया पर नियंत्रण की महत्वाकांक्षा और एक अनजान रक्षक का रहस्य आमने-सामने आते हैं, तब हर उत्तर एक नए खतरे को जन्म देता है।
अरविंद कुमार पांडेय उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पडरौना से हैं। उनका जन्म 9 जून 1984 को हुआ। कहानियों, कल्पनाओं और रहस्यमयी दुनिया के प्रति उनका लगाव उन्हें लेखन की ओर ले आया।
एक लेखक के रूप में उनका सफर आसान नहीं रहा। कई प्रयासों, अनुभवों और लगातार कोशिशों के बाद आज वे अपनी पहली उपन्यास त्रयी “कालाधर का रहस्य” के साथ पाठकों के सामने हैं। यह उनके लिए केवल एक पुस्तक-श्रृंखला नहीं, बल्कि वर्षों से संजोए गए एक विचार, कल्पना और सपने के साकार होने की कहानी है।
इस त्रयी की कल्पना और कहानी को आकार देने में उन्होंने लगभग 8–10 वर्ष लगाए। इस लंबे सफर में कहानी के पात्र, घटनाएँ, रहस्य और उसकी दुनिया धीरे-धीरे विकसित होते गए। भारतीय पौराणिक कथाओं से प्रेरणा, आधुनिक विज्ञान की संभावनाएँ, रहस्य, रोमांच और मानवीय भावनाएँ उनकी लेखन-यात्रा के प्रमुख हिस्से हैं।
“कालाधर का रहस्य” के माध्यम से वे पाठकों को ऐसी काल्पनिक दुनिया में ले जाने का प्रयास करते हैं, जहाँ प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एक-दूसरे से जुड़ते हैं और हर रहस्य के पीछे एक नया सवाल छिपा होता है।