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आधी रात की ट्रेन (A Train at Midnight)
जब अबू खुद को दुबई और बॉम्बे की जेलों की अंधेरी छायाओं में फँसा हुआ पाता है, तब उसे एहसास होता है कि जीवन कभी भी वैसा नहीं होता जैसा दिखाई देता है। घुटन भरी कोठरियों से लेकर भूलभुलैया जैसी गलियों तक, हर कदम अस्तित्व और उन अदृश्य शक्तियों के बीच संघर्ष बन जाता है जो भाग्य को आकार देती हैं।
घर लौटकर, अबू अपने अनुभवों को चुपचाप लिखने लगता है—सामान्य जीवन और असाधारण घटनाओं के बीच संतुलन बनाते हुए। लेकिन यह सामान्य दुनिया केवल एक मुखौटा है। मुरली सर—एक रहस्यमय व्यक्ति, जो आत्माओं और अलौकिक शक्तियों से जुड़ा हुआ है—अबू को जीवन, मृत्यु और उन बातों की भूलभुलैया में ले जाता है जो तर्क से परे हैं।
ऑफिस की गूँज, मोमबत्ती की टिमटिमाती लौ और नींद से भरी डरावनी रातों के बीच, अबू अपने सबसे गहरे भय का सामना करता है—भूतिया मौजूदगियाँ, रहस्यमय आगंतुक और प्रेम व वियोग की प्रेतछायाएँ। ग्रेसी मैडम से उसकी मुलाक़ात—एक पूर्व एयरहोस्टेस, जिनकी उपस्थिति भयावह भी है और कोमल भी—हकीकत और परलोक के बीच की रेखा को धुंधला कर देती है। अबू मृत्यु, आसक्ति और नियति के बारे में अपने हर विश्वास पर सवाल करने लगता है।
मरीन ड्राइव की बेचैन लहरों से लेकर मुरली सर के अपार्टमेंट के शांत गलियारों तक, हर पन्ना मानव मन और उन परछाइयों की यात्रा है जो हमारा पीछा करती रहती हैं। प्रेम, जुनून, रहस्य और अलौकिक तत्व आपस में गुँथकर ऐसी कहानी रचते हैं जो आख़िरी पन्ने के बाद भी मन में बनी रहती है।
आधी रात की ट्रेन भय, साहस और जीवितों तथा मृतकों को जोड़ने वाली अदृश्य डोरों की एक सम्मोहक पड़ताल है। मनोवैज्ञानिक थ्रिलर, अलौकिक रहस्य और साहित्यिक कथा के पाठकों के लिए यह नौवेला सस्पेंस के हृदय और मानवीय आत्मा की गहराइयों तक ले जाने वाली एक अविस्मरणीय यात्रा है।
यह नौवेला लेखक की मलयालम कृति Pathira Train का हिंदी अनुवाद है।
लेखक: अरबाब(Urbaab)
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