कमरा अभी खाली है
दीवार के उस पार सुबह
खेल खत्म होने के बाद
इस तस्वीर में मत आना
उस शाम कोई नहीं हारा
वह रात किराये की थी
नींद खुलने से पहले
कल यह पुल नहीं होगा
दरवाज़ा भीतर से खुला था
इतने में शादी नहीं होती
उस ग्रह पर दूसरी सुबह
मिट्टी ने नाम नहीं पूछा
चाँद की तीसरी खिड़की
जिस दिन मैं पानी में उतरा
परदे के पीछे कोई नहीं था
आखिरी बस मेरे लिए नहीं थी
जो लहर वापस नहीं आई
यह घोड़ा टिकट नहीं लेता
हार का अपना कमरा
उधार की एक सुबह
आधे बरामदे की धूप
नींद में चलता पहाड़
शून्य में रखी कुर्सी
तिची चौकट