वसीयत का आख़िरी पन्ना
दसवें गवाह का सच
अँगूठी पर लिखा दूसरा नाम
माँ ने जो नहीं कहा
डायरी का नौवाँ पन्ना
जिस रात नैना लौटी नहीं
फ़ाइल में दबी एक रात
घाट का गूँगा गवाह
मेरे हिस्से की छत
रात की रसीद
आख़िरी ओवर की क़सम
अधूरी किताब का वारिस
आख़िरी बस, पहली बारिश
चाय, चिट्ठी और चौबीस साल
पापा की आख़िरी दुकान
नीलकोठी की आख़िरी रात
पिता के अधूरे सपने
जिस दिन मैंने अपना सपना लौटाया
वह मैदान जो नींद में उगता था
सुबह मुझे मत जगाना
मेरे लौटने से पहले
आँगन का आख़िरी हिस्सा
बस में बची एक जगह
मिट्टी का दूसरा वज़न